Monday, 5 December 2011

जरुरत बना दिया..

अनगढ़े एक पत्त्थर को मूरत बना दिया,
उसे तराशा और सबसे खूबसूरत बना दिया
मालूम न थी कीमत खुद की मगर, उसे
मंदिर में बिठाकर सबकी जरुरत बना दिया..

11 comments:

  1. सार्थक पोस्ट, बधाई हो

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  2. Waah! ...Pyaari Pyaari si Peshkash Pyaari pyaari Renu Ji Ki...:)

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  3. बहुत सुंदर रचना...

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  4. तराशा और सबसे खूबसूरत बना दिया
    वाह ! बहुत अच्छी बात कही है …

    आदरणीया रेणु सिरोया जी
    सस्नेहाभिवादन !

    आपके ब्लॉग पर आ'कर बहुत प्रसन्नता हो रही है …


    …आपका भी मेरे दोनों ब्लॉग्स पर स्वागत है…
    पधारिएगा …

    *दुर्गा अष्टमी* और *राम नवमी*
    सहित
    ~*~ नव संवत्सर की बधाइयां शुभकामनाएं !~*~
    शुभकामनाओं-मंगलकामनाओं सहित…
    - राजेन्द्र स्वर्णकार

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  5. Replies
    1. bahut aabhar aap sabhi ka...

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    2. aabhar rajendra swarnkar ji, ..mai jarur padhungi...

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    3. tshukriya..kiran ji, neelkamal vaishnav ji. hamdum ji, kailash sharma ji...bahut aabhar aap sabhi ke protsahan ke liye...

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  6. NAMASKAR !
    aap k blog par aakar achcha laga . hardik badhai . sadhuwaad
    saadar

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