Wednesday, 30 May 2012

"हर पन्ने को सहेजा है"


पन्नो में बिखरे अरमान मेरे, और हर पन्ने को सहेजा है, उनमे बसी मेरी धड़कन और, हर शब्द-शब्द में लहजा है, दर्द ख़ुशी सब उनमे सिमटा, मन जब तन्हाई में उलझा है, लिख-लिखकर कई बार मिटाया, भावो का द्वंद्ध फिर सुलझा है, हर पल स्याही से कैद किया, हर उलझन को बूझा है, मेरी प्यारी सखी सहेली, कलम है, ना कोई दूजा है...*रेनू*

5 comments:

  1. bas likhate raho renu <.likh kar apane jiwan ke har tar ko samane lawo renu yahi he dili asha shubh kamnawo ke sath <.naveen kumar tiwari

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  2. likhane ki kala bahut kam logo ko milati he is kala me aap mahir ho rahi he dil me lagan he to use jahir karana jaruri he jaiho shubh kamna<.

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  3. हूदय स्पर्शी!!

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