Saturday, 26 June 2010

फिर क्यों अधूरी आज की नारी.

अरमानो की सेज पर एक सिसकती आह,
आसमान को छूने की फिर भी अटूट चाह,
अपने अस्तित्व को पाने की ढूँढती है राह,
कितनी सुन्दर कितनी न्यारी,
फिर क्यों अधूरी आज की नारी.
जग भर के शोषण की मारी ,
रिश्तों के चक्र में घूमती नारी,
तोड़ चुकी अब जंजीरे सारी,
कभी थकती कभी हारी,
फिर क्यों अधूरी आज की नारी,
बेदर्द जहां में वफ़ा निभाती,
घर और देश पे राज चलाती,
प्रलय बनकर झूंजती जाती,
हर कष्टों से लडती नारी,
फिर क्यों अधूरी आज की नारी.
दुनियां की तकदीर है नारी,
ममता की तस्वीर है नारी,
त्याग और बलिदान है नारी,
कितनी पावन कितनी प्यारी,
फिर क्यों अधूरी आज की नारी.
अब इंतज़ार है इंतकाम का नारी की आँखों को,
पुरूषों के अहम् को मिटाके जों खोल दे अपनी पांखो को
जिसने नारी के वज़ूद पर अधूरी छाप लगाईं है,
नारी के कोमल हर्दय में विद्रोह की ज्वाला जलाई है
मिलेगा एक दिन हक़ नारी को सबने कसम ये खाई है
धरती क्या अम्बर भी झुकेगा, ये सदियाँ अब वक़्त हमारा लाई है.

23 comments:

  1. "धरती क्या अम्बर भी झुकेगा,
    ये सदियाँ अब वक़्त हमारा लाई है"
    हार्दिक शुभकामनाएं

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  2. स्वागत है आपका । और एक प्रभावी रचना से आगाज़ करना पसंद आया । बहुत बहुत शुभकामनाएं

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  3. इसे जारी रखें। शुभकामनाएं !

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  4. बहुत बढ़िया!!

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  5. bahut khubsurat rachna.hai aapki........

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  6. हिन्दी ब्लॉगजगत के स्नेही परिवार में इस नये ब्लॉग का और आपका मैं ई-गुरु राजीव हार्दिक स्वागत करता हूँ.

    मेरी इच्छा है कि आपका यह ब्लॉग सफलता की नई-नई ऊँचाइयों को छुए. यह ब्लॉग प्रेरणादायी और लोकप्रिय बने.

    यदि कोई सहायता चाहिए तो खुलकर पूछें यहाँ सभी आपकी सहायता के लिए तैयार हैं.

    शुभकामनाएं !


    "टेक टब" - ( आओ सीखें ब्लॉग बनाना, सजाना और ब्लॉग से कमाना )

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  7. आपका लेख पढ़कर हम और अन्य ब्लॉगर्स बार-बार तारीफ़ करना चाहेंगे पर ये वर्ड वेरिफिकेशन (Word Verification) बीच में दीवार बन जाता है.
    आप यदि इसे कृपा करके हटा दें, तो हमारे लिए आपकी तारीफ़ करना आसान हो जायेगा.
    इसके लिए आप अपने ब्लॉग के डैशबोर्ड (dashboard) में जाएँ, फ़िर settings, फ़िर comments, फ़िर { Show word verification for comments? } नीचे से तीसरा प्रश्न है ,
    उसमें 'yes' पर tick है, उसे आप 'no' कर दें और नीचे का लाल बटन 'save settings' क्लिक कर दें. बस काम हो गया.
    आप भी न, एकदम्मे स्मार्ट हो.
    और भी खेल-तमाशे सीखें सिर्फ़ "टेक टब" (Tek Tub) पर.
    यदि फ़िर भी कोई समस्या हो तो यह लेख देखें -


    वर्ड वेरिफिकेशन क्या है और कैसे हटायें ?

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  8. achchha likha hai aapne, badhai aur welcome to bloggers world. pls do keep writting

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  9. इंतकाम की बातें! वाह! बहुत खूब!

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  10. शानदार आगाज ,स्वागत है ब्लाग जगत में ।

    कृपया वर्ड-वेरिफिकेशन हटा लीजिये
    वर्ड वेरीफिकेशन हटाने के लिए:
    डैशबोर्ड>सेटिंग्स>कमेन्टस>Show word verification for comments?>
    इसमें ’नो’ का विकल्प चुन लें..बस हो गया..कितना सरल है न हटाना
    और उतना ही मुश्किल-इसे भरना!! यकीन मानिये

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  11. क्या आप हमारीवाणी.कॉम के सदस्य हैं?

    जल्द ही आ रही है ब्लॉग लेखकों के अपनी वाणी "हमारीवाणी":
    http://hamarivani.com - हिंदी ब्लॉग लेखों का अपना एग्रिगेटर

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  12. स्वागत है आपका । शानदार आगाज बहुत बहुत शुभकामनाएं

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  13. आपके ब्लोग पर आ कर अच्छा लगा! ब्लोगिग के विशाल परिवार में आपका स्वागत है! अन्य ब्लोग भी पढ़ें और अपनी राय लिखें! हो सके तो follower भी बने! इससे आप ब्लोगिग परिवार के सम्पर्क में रहेगे! अच्छा पढे और अच्छा लिखें! हैप्पी ब्लोगिग!

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  14. behn renu aapne chnd alfaazon men bhut kuch khaa he lekin bs aek shikaayt he ke aaj koi naari adhuri nhin he. akhtar khan akela kota rajsthan mera hindi blog akhtarkhanakela.blogspot.com

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  15. बहुत ही प्रभावशाली रचना।

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  16. मेरा नाम शम्बूक है।"
    शम्बूक की बात सुनकर रामचन्द्र ने म्यान से तलवार निकालकर उसका सिर काट डाला। जब इन्द्र आदि देवताओं ने महाँ आकर उनकी प्रशंसा की तो श्रीराम बोले, "यदि आप मेरे कार्य को उचित समझते हैं तो उस ब्राह्मण के मृतक पुत्र को जीवित कर दीजिये।" राम के अनुरोध को स्वीकार कर इन्द्र ने विप्र पुत्र को तत्काल जीवित कर दिया। http://hindugranth.blogspot.com/

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  17. बहुत अच्छी रचना

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  18. aap sabhi ke protsaahanke liye mai dil se aabhari hun....danyawaad

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  19. " बाज़ार के बिस्तर पर स्खलित ज्ञान कभी क्रांति का जनक नहीं हो सकता "

    हिंदी चिट्ठाकारी की सरस और रहस्यमई दुनिया में राज-समाज और जन की आवाज "जनोक्ति.कॉम "आपके इस सुन्दर चिट्ठे का स्वागत करता है . चिट्ठे की सार्थकता को बनाये रखें . अपने राजनैतिक , सामाजिक , आर्थिक , सांस्कृतिक और मीडिया से जुडे आलेख , कविता , कहानियां , व्यंग आदि जनोक्ति पर पोस्ट करने के लिए नीचे दिए गये लिंक पर जाकर रजिस्टर करें . http://www.janokti.com/wp-login.php?action=register,
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  20. अब तो हर तरफ खिले हें तेरी यादों के गुलाब,
    दिल के इस वीराने में यह बात कहाँ थी पहले..!

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  21. बहुत अच्छी रचना

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  22. सुंदर अभिव्यक्ति. आपके ब्लाग पर आकर अच्छा लगा.. चिट्ठाजगत में आपका स्वागत है... हिंदी ब्लागिंग को आप नई ऊंचाई तक पहुंचाएं, यही कामना है....
    इंटरनेट के जरिए घर बैठे अतिरिक्त आमदनी के इच्छुक ब्लागर कृपया यहां पधारें-
    http://gharkibaaten.blogspot.com

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  23. aapne meri kekhni ko saraha or mera utsaah vardhan kiya uske liye mai dil se aabhri hun.
    danyawad

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