Wednesday, 12 May 2010

मेरे खोये हुवे बचपन तेरी तलाश है मुझको,
जीवन के उन सुन्दर क्षणों की प्यास है मुझको,
वह मन की निश्चलता वह तन की सुन्दरता,
उसे फिर से पा जाऊ ये अरमान है मुझको,
मेरे खोये हुए..........
वो रोना वो हँसना वो गिरना और मचलना,
बचपन की सुहानी घड़ियाँ फिर पाने की आस है मुझको
मेरे खोये हुए..........................
वो अल्हड़पन,वो नटखटपन,वो जीवन के मीठे पल,
उन पलो को फिर जीने की चाह है मुझको,
मेरे खोये हुए.........................
थे हम प्यारे सबके दुलारे मीठी बातों से सबको रिझाते,
फिर से उसी मधुरता का एहसास हो मुझको
मेरे खोये हुए....................................
वो बचपन की गलियां वो ममता की छैय्या,
हर पल चुराती हें जीवन का,आती हुई ये घड़ियाँ
फिर से बचपन आ जाये यही अरमान है मुझको
मेरे खोये हुए...........................
सारी दौलत कोई लेले बचपन की घड़ियाँ देदे,
बस कुछ पल उनमे खो जाऊ,ये आखरी चाह है मुझको
मेरे खोये हुए..................

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2 comments:

  1. bahut madhur, saral bachpan ki tarah. keep it up.

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  2. हिन्दी चिट्ठाजगत में स्वागत है।
    अच्छी कवितायें हैं लिखती चलिये।
    लगता है कि आप हिन्दी फीड एग्रगेटर के साथ पंजीकृत नहीं हैं यदि यह सच है तो उनके साथ अपने चिट्ठे को अवश्य पंजीकृत करा लें। बहुत से लोग आपके लेखों का आनन्द ले पायेंगे। हिन्दी फीड एग्रगेटर की सूची यहां है।
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