
*सुख और दुःख में बहते आंसू
सदा संग ही रहते आंसू
ख़ुशी का पल या गम की आंधी
हर अहसास में बहते आंसू,
*तन्हाई में रहते आंसू
कभी-कभी तो छलते आंसू
दिल की दीवारे भेद कर
छलक के फिर बहते आंसू,
*बिछड़ के आ जाते आंसू
मिलन में न रुक पाते आंसू
बहते आंसू जब क़ोई पौंछे
राज़ बयां कर जाते आंसू,
*ख़ुशी के हो या गम के आंसू
एक से होते है ये आंसू
बड़ी अनोखी इनकी भाषा
कहे बिना सब कहते आंसू...
बेहद खुबसुरत रचना दिल को छूती हुई, बधाई
ReplyDeletethanx...suresh choudhary ji..
ReplyDeleteबहुत बहुत हार्दिक बधाई
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